जानिए अश्वगंधा किस काम आता है और अश्वगंधा की तासीर कैसी होती है?


अश्वगंधा विषयसूची

अश्वगंधा से सम्बंधित जानकारी और अश्वगंधा किस काम आता है

सबसे बड़ा सवाल, आखिर, अश्वगंधा किस काम आता है? चलिए जानते है। अश्वगंधा, आयुर्वेद जड़ी बूटियों में एक अहम मुकाम रखती है, यह पीले फूल वाला छोटा पौधा होता है जो भारत और दक्षिणी एशिया में पैदा होता है। अश्वगंधा में एक विशेष प्रकार की गंध होती है, जो घोड़े के पसीने के समान होती है।

इसको वानस्पतिक नाम विथानिया सोमनीफेरा के नाम से जाना जाता है। भारत में लोग इसको इंडियन जिनसेंग, वाजीगंधा, वराह करणी, विंटर चेरी और असगंध के नाम से भी जानते हैं। इसको अर्क, जड़ और पाउडर आदि के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
इसका उपयोग प्राकृतिक उपचार के तौर पर भारतीय सिद्धांतो के अनुसार किया जाता है। अश्वगंधा पर आधारित लेख में आप, इसके उपयोग, फायदे, नुकसान, खुराक और सुरक्षा के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।

अश्वगंधा के उपयोग

अश्वगंधा का उपयोग तनाव, चिंता, पुरुषों के बांझपन में, मधुमेह, गठिया, टेस्टेस्टोरोन, नींद, सूजन, उच्च रक्तचाप, दिमाग की कार्य प्रणाली को सुधारने और पार्किंसंस जैसी बिमारियों को ठीक करने में प्रभावकारी हो सकता है।

अश्वगंधा से तनाव में होने वाले फायदे

तनाव के कारण एड्रेनोकोर्टिकोट्रोपिक हार्मोन का स्राव बढ़ता है, जो कोर्टिसोल हार्मोन को बढ़ाने में सहायक होता है। जबकि अश्वगंधा के सेवन से कोर्टिसोल का स्तर कम होता है, जिससे तनाव से जुड़ी समस्याओं को कम करने में मदद मिलती है। साथ ही यह तनाव से लड़ने की क्षमता को भी बेहतर करता है।

चिंता में अश्वगंधा से होने वाले फायदे

जब कोई व्यक्ति चिंताओं से घिरा रहता है, तो वह मानसिक और शारीरिक तौर पर स्वस्थ नहीं रह पाता। अश्वगंधा का सेवन चिंता को ख़त्म कर सकता है। कुछ शोधों से मिली जानकारी के अनुसार अश्वगंधा का उपयोग करने से चिंता में राहत मिलती है।

पुरुषों के बांझपन में फायदेमंद हो सकता है

अश्वगंधा का सेवन शुक्राणुओं की क्षति को कम करता है, जिस कारण शुक्राणुओं की मृत्यु दर कम हो जाती है। यह शुक्राणुओं की संख्या को बढ़ाने के साथ उनकी गुणवत्ता में भी सुधार करता है। कुछ दिनों तक सेवन करने से पुरुषों की बांझपन की समस्याओं को समाप्त कर देता है।

टेस्टोस्टेरोन को बढ़ाने में मददगार है

अश्वगंधा में उत्तेजना पैदा करने वाले गुण मौजूद हैं, जो कामशक्ति को प्रबल करते हैं। टेस्टोस्टेरोन के स्तर को नियंत्रित करता है, जिससे पुरूषों की परफॉर्मेंस में सुधार होता है। यह मुख्य रूप से शुक्राणुओं को मोटा बनाता है। उनकी क्षति को रोकता है जिससे शुक्राणुओं की गुणवत्ता में सुधार होता है। इस प्रकार पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन की समस्या को समाप्त करने में सहायक है।

गठिया में अश्वगंधा से होने वाले फायदे

अश्वगंधा में एनाल्जेसिक गुणों के होने से गठिया से जुड़े दर्द में राहत मिलती है। अश्वगंधा की पत्तियों और जड़ों में विथेफेरिन ए होने से प्रोस्टाग्लैंडीन के उत्पादन में रोक लगती है, जो गठिया में सूजन और दर्द को कम करता है।

अश्वगंधा उच्च रक्तचाप में प्रभावकारी हो सकता है

अश्वगंधा में ऐसे तत्व हैं, जो तनाव और चिंता के स्तर को कम करने में मददगार हैं। तनाव और चिंता दोनो मुख्य रूप से उच्च रक्तचाप को बढ़ाते हैं। उच्च रक्तचाप में इंसान को गुस्सा आता है, और वह आमतौर से ज्यादा गुस्से का शिकार हो जाता है। छोटी छोटी बातों पर भी वह हाइपर होने लगता है। आयुर्वेदिक दवा अश्वगंधा इसको सही करने में प्रभावकारी सिद्ध हो सकती है।

पार्किंसंस में अश्वगंधा के फायदे

पार्किंसंस जैसी बीमारी में लाभदायक हो सकता है। यह बीमारी कोशिकाओं की क्षति की वजह से होती है, इस बीमारी से शरीर की गति अनियंत्रित हो जाती है। और यह मांशपेशियों के संतुलन और नियंत्रण को भी प्रभावित करती है। जिसके कारण मनुष्य गति और मांसपेशियों पर अपना संतुलन खोने लगता है और उनको सही से नियंत्रित करने में कठिनाई होने लगती है।

अश्वगंधा सूजन को कम करने में सहायक हो सकता है

अश्वगंधा में कुछ ऐसे यौगिक है, जो सूजन को कम या समाप्त कर सकते हैं। एक अध्यन के मुताबिक
WA इंटरल्युकिन 10 जैसे सूजन पैदा करने वाले प्रोटीन के स्तर को कम कर सकता है। यह सूजन के निशानों को भी कम करने में मदद करता है। जबकि अभी इस पर कुछ और शोध करने की जरूरत है।

दिमाग की कार्य प्रणाली को सुधारने में मददगार हो सकता है

अश्वगंधा का उपयोग कुछ लोगो के लिए वरदान साबित हो सकता है। जो लोग याददाश्त कमजोर जैसे मसलों से जूझ रहे हैं उनके लिए अश्वगंधा एक बेहतर पूरक हो सकता है। एक अध्यन में शामिल कुछ लोगो पर इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं। इसके सेवन के पश्चात ध्यान, समय की प्रतिक्रिया, कार्यकारी कामकाज और सूचना प्रसंस्करण की गति में सुधार दर्ज किया गया है।

अश्वगंधा नींद में सुधार करती है

अश्वगंधा में कई प्रकार के तत्व है, जिस कारण यह अनेक प्रकार की बिमारियों में सहायक है। नीद से जुडी समस्याओं में भी यह प्रभावी रूप से कार्य करती है। यह मस्तिष्क को शांत कर नींद को प्रभाशाली ढंग से लाने में सहयोग करती है। एक रिपोर्ट के अनुसार कुछ व्यस्को द्वारा बारह सप्ताह तक अश्वगंधा की जड़ लेने से उनकी मानसिक सतर्कता, चिंता में कमी और नींद में सुधार होना पाया गया है।

अश्वगंधा के दुष्प्रभाव

अश्वगंधा के दुष्प्रभाव जैसे बेहोशी, पेट दर्द, मतली, दस्त और निम्न रक्तचाप हो सकते हैं, कुछ बिना सूचीबद्ध किए गए लक्षण भी प्रकट हो सकते हैं।

अश्वगंधा का उपयोग करने से पहले जानने वाली कुछ सावधानियां

पेट की समस्या जैसे पेप्टिक अल्सर में अश्वगंधा का उपयोग करने से बचें।
स्तनपान कराने वाली महिलाएं भी अश्वगंधा का सेवन ना करें।

दवाओं के साथ प्रतिक्रिया

यदि आप थायरॉयड की दवाईयां ले रहे हैं, तो अश्वगंधा का उपयोग पूरी निगरानी के साथ करें क्योंकि इसमें थायरॉयड के उत्पादन को बढाने वाले घटक पाए जाते हैं।

यदि आप कोई शामक दवाई ले रहें हैं, तो अश्वगंधा का सेवन करने से पहले चिकित्सक से सलाह लें।

मधुमेह के रोगी यदि अश्वगंधा का सेवन कर रहे हैं, तो उनको यह मालूम होना चाहिए कि यह खून में शर्करा के स्तर को कम करता है

गर्भावस्था में अश्वगंधा का सेवन ना करें क्योंकि इसका सेवन गर्भाशय संकुचन को बढ़ा सकता है।

उच्च रक्तचाप की दवाईयों का सेवन करते हुए अश्वगंधा के इस्तेमाल से बचें क्योंकि यह भी रक्तचाप को कम करता है।

गुर्दे की बीमारियों में भी अश्वगंधा का सेवन करने परहेज करें क्योंकि अश्वगंधा मूत्रवर्धक वाले गुण रखता है।

अश्वगंधा की खुराक

टैबलेट – एक टैबलेट सुबह और एक शाम
कैप्सूल – एक कैप्सूल सुबह और एक शाम
पाउडर – 1/4 या 1/2 चम्मच सुबह और शाम
अर्क – 600 एमएल दिन में दो बार सुबह और शाम

दवाई की खुराक रोग के अनुसार कम ज्यादा हो सकती है इसके लिए चिकित्सक से सलाह लें। दवाई को भोजन के बाद पानी या दूध के साथ सेवन कर सकते हैं।

Scroll to Top